तीसरी आंख

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सोमवार, अगस्त 03, 2026

काबा शरीफ की परिक्रमा एंटी क्लॉक वाइज होती है

क्या आप जानते हैं कि काबा शरीफ की परिक्रमा, जिसे तवाफ कहा जाता है, एंटी-क्लॉकवाइज होती है।

मुसलमान जब मक्का शरीफ में उमरा या हज के दौरान तवाफ करते हैं, तो वे काबा के चारों ओर बाएं कंधे को काबा की तरफ रखते हुए घड़ी की सुइयों के उलटे यानि एंटी क्लॉक वाइज दिशा में सात चक्कर लगाते हैं। यह क्रम पैगम्बर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और हजरत मुहम्मद की सुन्नत से चला आ रहा है।

एंटी-क्लॉक वाइज तवाफ करने के पीछे कारण यह भी माना जाता है कि पूरी कायनात में ग्रह-नक्षत्र सूर्य के चारों ओर,

इलेक्ट्रॉन परमाणु के नाभिक के चारों ओर और खगोलीय पिंड अपने केंद्र के चारों ओर इसी दिशा में घूमते हैं।

यानी यह दिशा फितरत यानि प्रकृति के नियमों से भी मेल खाती है। ग्रहों की गति के बारे में वैज्ञानिक तथ्य इस प्रकार हैंः- सौर मंडल के अधिकतर ग्रह जैसे पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, वरुण आदि सूर्य की परिक्रमा एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में करते हैं। यह दिशा खगोलशास्त्र में प्रोगेड मोषन कहलाती है। इसी तरह अधिकतर ग्रह अपनी धुरी पर भी एंटी-क्लॉकवाइज घूमते हैं, जैसे पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। कुछ अपवाद भी हैं। 

शुक्र अपनी धुरी पर क्लॉकवाइज घूमता है। अरुण का घूर्णन अक्ष लगभग 98° झुका हुआ है, इसलिए उसका घूमना भी असामान्य प्रतीत होता है।

786 का मतलब व महत्व क्या है?

 786 की संख्या अरबी भाषा में बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह एक छोटी सी दुआ है, जो कुरआन के प्रत्येक अध्याय के आरम्भ में लिखी जाती है। इसका मतलब है अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है। इस्लाम धर्म में कोई भी काम शुरू करते समय “बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम” पढते हैं।

सवाल उठता है कि 786 की उत्पत्ति कैसे हुई? परंपरागत रूप से अरबी में प्रत्येक अक्षर को एक संख्या का मूल्य प्रदान कर दिया गया है। बिस्मिल्लाह-हिर्रहमा-निर्रहीम लिखने में इसमें जो अक्षर आते हैं, उनका अंकीय मूल्य कुल मिला कर 786 होता है।

ज्ञातव्य है कि कुछ लोग जब कोई चीज रिकार्ड करते हैं अथवा पत्र में बिस्मिल्लाह लिखना चाहते हैं तो वह पूरी दुआ लिखने की बजाए केवल 786 लिख देते हैं। इस्लाम में इसे कोई धार्मिक महत्व प्राप्त नहीं है। यह मात्र एक साहित्यिक परम्परा है, जो अरबी साहित्य में जारी है। कुछ अंधविश्वासों ने आधुनिक रूप अपना लिया है। इसी तरह 786 भी एक आधुनिक हथियार बन गया है। कुछ धनवान मुसलमान यह चाहते हैं कि उनकी कारों के लिए एक ऐसा रजिस्ट्रेशन नम्बर मिल जाए, जिसके आखिरी अंक 786 हों। कुछ लोग चाहते हैं कि उनके मोबाइल फोन के अन्तिम अंक 786 हों। वे इसके लिए अच्छा-खासा धन खर्च करने के लिए तैयार होते हैं। सिनेमा उद्योग भी इस संख्या के भावनात्मक आकर्षण का शोषण करना चाहता है, जिसे बॉलीवुड की सफलतम फिल्म वीर जारा में शाहरुख खान को लाहौर जेल में कैदी संख्या 786 के रोल में देखा जा सकता है।

आपको याद होगा कि फिल्म दीवार में अमिताभ के सीने पर गोली लगती है और उन्हें कुछ नहीं होता। गोली उनके बिल्ला नम्बर 786 से टकरा कर बेकार हो जाती है। अमिताभ फिल्म कुली में वही चमत्कारी बिल्ला नंबर 786 लगाते हैं।