वाल्मिकी रामायण अनुसार मूर्च्छित लक्ष्मण के लिए हनुमानजी यह बूटी लेकर आए थे। जब लक्ष्मण मेघनाद (इंद्रजीत) के बाण से घायल होकर बेहोश हो गए थे, तो हनुमानजी को “संजीवनी बूटी” लाने के लिए हिमालय की द्रोणगिरि पर्वत भेजा गया। कहा जाता है, हनुमान पूरे पर्वत को ही उठा लाए क्योंकि उन्हें सही बूटी पहचान में नहीं आई। उस बूटी से लक्ष्मण फिर जीवित हो गए। इसका यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इनमें जीवनदायिनी, पुनर्जीवित करने वाली या अत्यंत शक्तिशाली औषधीय गुण पाए जाते हैं।
इस बूटी के दम पर ही शुक्राचार्य ने देवासुर संग्राम में असुरों को जीवित कर दिया था। आजकल वैज्ञानिक पारे, गंधक और आयुर्वेद में उल्लेखित कई प्रकार की जड़ी-बूटियों पर शोध कर रहे हैं और इसके चमत्कारिक परिणाम भी निकले हैं, लेकिन जहां तक सवाल संजीवनी बूटी का है तो यह शोध और खोज का विषय है। वैज्ञानिक दृष्टि से अब तक ऐसी किसी जड़ी-बूटी का पक्का प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि, उत्तराखंड और हिमालय के कई हिस्सों में कुछ दुर्लभ औषधीय पौधे हैं, जिनको “संजीवनी” नाम से जाना जाता है क्योंकि वे सूख जाने पर भी पानी मिलने पर फिर हरे हो जाते हैं और उनमें उच्च औषधीय गुण पाए जाते हैं। जिससे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति बढती है। इससे बुखार, थकान और मानसिक तनाव में राहत मिलती है। यह घाव भरने और कोशिकाओं को पुनर्जीवित करने में सहायक होती है। इसी प्रकार ऑर्किड वर्ग की जड़ी उत्तराखंड, सिक्किम व अरुणाचल प्रदेश में पाई जाती है। चीनी व तिब्बती चिकित्सा में इसे “जीवनवर्धक औषधि” कहा जाता है। यह ऊर्जा, पाचन और प्रतिरक्षा को बढ़ाती है। यह षरीर में जीवन षक्ति संतुलित करती है। इसी प्रकार एरिथ्रिना इंडिका, जिसे हम पारिजात या भारतीय कोरल वृक्ष के रूप में जानते हैं। इसमें एनाल्जेसिक यानि दर्द निवारक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। कभी-कभी लोक चिकित्सा में इसे “संजीवनी वृक्ष” कहा जाता है। हिमालयी क्षेत्र में एंजेलिका ग्लौका जडी पाई जाती है। यह अत्यंत सुगंधित औषधीय पौधा है। तंत्रिका तंत्र और श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करता है।
इसी प्रकार जिनसेंग एक प्रसिद्ध चीनी औषधीय जड़ी है, जिसका उपयोग सदियों से ऊर्जा बढ़ाने, थकान घटाने और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए किया जाता है। इसको अक्सर “मल्टीविटामिन फॉर्मूले” में डाला जाता है, क्योंकि यह शरीर की जीवन शक्ति बढ़ाने में मदद करती है। लोकप्रिय ब्रांड रिवाइटल व एक्सप्लोड में यह पायी जाती है। मगर अत्यधिक सेवन से नींद न आना, उच्च रक्तचाप या बेचैनी जैसी समस्या हो सकती है। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेना चाहिए। एस्टागेलस मेम्बरानासिइस जड़ी पारंपरिक चीनी चिकित्सा में उपयोग होती है, जैसे कि इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए। पॉलीगोनम मल्टिफोरम जडी पारंपरिक चीनी चिकित्सा में उपयोग होती है, विशेष रूप से “जीर्णता” को धीमा करने के लिए, बालों को काला करने, और लम्बी उम्र के लिए। परन्तु ये सभी पौधे रामायण की “संजीवनी” नहीं माने जा सकते, केवल प्रतीकात्मक रूप से उनसे जोड़े जाते हैं।