तीसरी आंख

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सोमवार, मार्च 09, 2026

मौली व कलावा क्यों बांधा जाता है?

भारतीय परंपरा में हाथ की कलाई पर मौली या कलावा बांधने की रस्म सर्वविदित है। क्या आपने कभी ख्याल किया है कि मौली क्यों बांधी जाती है? वस्तुतः यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, मनोविज्ञान, सामाजिक पहचान और प्रतीक-विद्या का सुंदर मेल है। प्राचीन काल में लोग मानते थे कि मौली में मंत्र-संरक्षित शक्ति होती है। यज्ञ, पूजा या संकल्प के समय इसे बांध कर व्यक्ति को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा का संकेत दिया जाता था। यह मनोवैज्ञानिक सुरक्षा भी देती है। कलाई पर यह धागा दिखते ही मन में आत्मविश्वास बढ़ता है कि मैं संरक्षित हूं, शुभ कार्य कर रहा हूं। हिंदू कर्मकांड में संकल्प बहुत महत्त्वपूर्ण है। मौली इसी का प्रतीक है। कलाई पर हर बार नजर पड़ने से व्रत और अनुशासन याद रहता है, यह एक मानसिक रिमाइंडर भी है। 

आपको ख्याल में होगा कि कलावा सामान्यतः तीन रंगों में होता है। लाल रंग शक्ति, ऊर्जा व मंगल, पीला ज्ञान, बुद्धि, गुरु-शक्ति और सफेद पवित्रता व सत्य का प्रतीक है। इनका मिश्रण व्यक्ति की देव, धर्म और धर्म-चक्र से जुड़ाव को दर्शाता है। कुछ परंपराएं मानती हैं कि कलाई पर धागा बांधने से नाड़ी बिंदुओं पर हल्का दबाव पड़ता है और रक्त-संचार बेहतर होता है, ध्यान और मन में स्थिरता आती है। हालांकि यह आधुनिक विज्ञान से प्रमाणित नहीं है, पर एक्यूप्रेशर जैसी प्रणालियों में कलाई को महत्त्वपूर्ण माना जाता है। कुल मिला कर मौली सुरक्षा का प्रतीक तो है ही, संकल्प को स्मरण कराता है। मनोवैज्ञानिक सहारा देती है। यह पॉजिटिव रिइन्फोर्समेंट मन में शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाता है।

रक्षा बंधन के दिन बहिन का भाई को राखी या रक्षा सूत्र बांधने के पीछे भी रक्षा का संकल्प लेने का प्रतीक है। रक्षा सूत्र बांध कर बहिन भाई की सुरक्षा की कामना करती है, साथ ही भाई से उसकी सुरक्षा की उम्मीद करती है।

रक्षा-सूत्र अर्थात ऐसा धागा जो हमें किसी न किसी रूप में सुरक्षा प्रदान करता है, शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक।

पुराणों में उल्लेख है कि यज्ञ-कर्म, व्रत, संस्कार, पूजा आदि में पुरोहित दाएं हाथ पर रक्षा-सूत्र बांधता है। इसे प्रोटेक्शन टैग की तरह माना गया। यकीन है कि इससे नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और शुभ कार्य में व्यवधान नहीं आता। मौली बांध कर यह मंत्र  बोला जाता है - येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः, अर्थात जिस धागे ने बलि और अन्य दैत्य राजाओं की रक्षा की, वही धागा तुम्हारी भी रक्षा करे। मंदिरों, त्योहारों और यज्ञों में सभी को रक्षा-सूत्र बांधा जाता है, यह समानता और सामूहिक आशीर्वाद का प्रतीक है।