तीसरी आंख

जिसे वह सब दिखाई देता है, जो सामान्य आंखों से नहीं दिखाई देता है

रविवार, जनवरी 25, 2026

शवदाह के बाद पीछे मुड़ कर क्यों नहीं देखते?

आपको जानकारी होगी कि षव का अंतिम संस्कार करने के बाद पीछे मुड कर न देखने की सलाह दी जाती है। क्या आपने सोचा है कि इसकी वजह क्या है? इस बारे में गरूड पुराण में कहा गया है कि जब षव को अग्नि के हवाले करने के बाद नाते-रिष्तेदार लौट रहे होते हैं तो मृतक की आत्मा उनको देख रही होती है और मोहवष उनके साथ लौटना चाहती है, जब कि मृत्योपरांत अंत्येश्टि के बाद उसे आगे की यात्रा करनी होती है। यदि परिजन पीछे मुड कर देखते हैं तो मृतात्मा को मोह के बंधन से मुक्त होने में कठिनाई होती है। उसकी आगे की यात्रा (यमनाड, पितृलोक या पुनर्जन्म की प्रक्रिया) में बाधा आती है। कुल जमा बात यह है कि मृत आत्मा के इस जगत से संबंध विच्छेद के वक्त किसी तरह का मोह उत्पन्न न हो इसके लिए परिजन को पीछे मुड कर न देखने को कहा जाता है।

आपको यह भी जानकारी होगी कि जब ज्योतिशी चौराहे, तिराहे अथवा वृक्ष इत्यादि पर कोई टोटका करने की सलाह देते हैं तो साथ हिदायत देते हैं कि टोटके के बाद पीछे मुड कर नहीं देखना है। कदाचित इसके पीछे भी वही दर्षन है कि आप जो भी टोटका कर रहे हैं, वह स्वतंत्र रूप से तभी काम करेगा, जबकि आप उससे संबंध विच्छेद कर लेंगे। “पीछे न देखना” का असली संदेश यह है कि आपने जो कर्म किया है, उसे पूर्ण मानो। उससे भावनात्मक या ऊर्जात्मक जुड़ाव न रखो।