कुल-परिवार, वातावरण, संस्कार, कर्मसंचय भी महत्वपूर्ण होते हैं। दो बच्चों का जन्मस्थान एक हो सकता है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति, शिक्षा का माहौल, पालन-पोषण अलग होने से भाग्यफल पूरी तरह बदल जाता है।
वेदांत और पारंपरिक ज्योतिष कहता है कि प्रत्येक जीव अपने पूर्व जन्म के संस्कार लेकर आता है। इसलिए भले ही दो लोग एक ही समय पर जन्में, उनके पूर्व जन्म के कर्मसंचय अलग होते हैं। इससे एक को अवसर जल्दी मिलता है, एक को संघर्ष ज्यादा, एक का मन रचनात्मक होता है और दूसरा साहसवादी होता है। ये सब ग्रहों की एक ही स्थिति होने पर भी फल को अलग बना देते हैं, क्योंकि कर्मसंस्कार अलग होते हैं।
एक बात और। दो बच्चों की महादशाएं तो समान हो सकती हैं, परंतु
अंतर्दशा, प्रत्यंतर, सूक्ष्म दशा का प्रारंभ कुछ सेकंडों के अंतर से बदल जाता है। इससे पूरे जीवन में घटनाओं के समय अलग-अलग हो जाते हैं और यहीं से भाग्य का अंतर शुरू हो जाता है।
भले ही सामान्य जन्मपत्री समान लगे, परंतु चंद्र लग्न, सूर्य लग्न, अष्टकवर्ग के अंक, भिन्न ग्रहों का बल, भाव के अंष्ज्ञ, इनमें छोटा सा अंतर भी पूरी भविष्यवाणी बदल देता है। केपी और नाड़ी ज्योतिष में सेकंड के स्तर तक अंतर माने जाते हैं। व्यक्तित्व जन्म के बाद के परिवेश से बनता है। अवसरों की उपलब्धता भाग्य को बदल देती है। सोच और प्रतिक्रियाएं एक ही घटना को दो लोग अलग तरह से लेते हैं।
कुल जमा भाग्य समान नहीं, सम्भावनाएं समान होती हैं। जन्म केवल शुरुआती ढांचा देता है, लेकिन मनुष्य का चुनाव, कर्म, दिशा भाग्य को आकार देते हैं। संक्षेप में एक ही समय पर जन्मे बच्चों का भाग्य अलग होता है क्योंकि जन्म का समय सूक्ष्म रूप से अलग होता है, लग्न एवं विभाजित कुंडलियाँ बदल जाती हैं, पूर्व-जन्म कर्मसंस्कार अलग होते हैं, पालन-पोषण और परिवेश अलग होता है, दशाएं-उपदशाएं अलग-अलग समय पर चलती हैं, ग्रहों का बल और अंश सूक्ष्म रूप से भिन्न होता है। परिवार और वातावरण अलग होते हैं, भले ही जन्म समय समान हो, पर एक बच्चा संपन्न परिवार में जा रहा है, दूसरा संघर्षशील परिवार में, किसी के माता-पिता का स्वभाव अलग है, किसी को शिक्षा, अवसर, पोषण अलग मिलेगा। किसे कितना प्रेम मिला, किसे कितनी सुरक्षा मिली, किस पर कितना अनुशासन या स्वतंत्रता हुई, ये सब भविष्य पर गहरा असर डालते हैं।
इसे यूं भी समझा जा सकता है कि दो पेड़ एक ही दिन लगाए जा सकते हैं, लेकिन मिट्टी, पानी और धूप अलग हो तो उनकी बढ़त भी अलग हो जाती है। इसी प्रकार पास-पास पैदा हुए दो नवजात शिशुओं की जीवन यात्रा दो नदियों की तरह अपनी-अपनी दिशा पकड़ लेती है।
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