तीसरी आंख

जिसे वह सब दिखाई देता है, जो सामान्य आंखों से नहीं दिखाई देता है

शुक्रवार, अप्रैल 17, 2026

भूत होते हैं या नहीं?

मानव जाति ने बहुत विकास किया है। हम बहुत ज्ञानी और सुशिक्षित हो गए हैं, मगर एक गुत्थी ऐसी है, जिसे आज भी पक्के तौर पर सुलझाया नहीं जा सका है। वो है- भूत होते हैं या नहीं? पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। इसको लेकर खूब बहस होती रहती है। कुछ लोगों का दावा होता है कि उन्होंने भूत देखा है, उसकी झलक देखी है या उसके वजूद को महसूस किया है। इसके अनेक प्रकरण संज्ञान में आए हैं। चूंकि भूत को वैज्ञानिक नजरिये से साबित नहीं किया जा सका है, इस कारण अधिसंख्य लोग ऐसे हैं, जो ये कहते हैं कि भूत कोरा वहम है, उसको कोई अस्तित्व नहीं है। यदि हम मान भी लें कि भूत नहीं होते हैं, तो भी इस बात को तो स्वीकार करते हैं कि अमुक स्थान पर जाने पर भय प्रतीत होता है। वह क्या है? समझा जाता है कि ऐसा वहां उपस्थित नेगेटिव एनर्जी की वजह से होता है।

इसी बीच इस मुद्दे पर विज्ञान ने भी काम आरंभ कर दिया है। अब तक के अध्ययन के अनुसार नकारात्मक एनर्जी को भूत कहा जा सकता है। बाकायदा एक तकनीकी डिवाइस बना ली गई है, जो नेगेटिव एनर्जी का पता लगा लेती है। यह डिवाइस इलैक्टोमेग्नेटिव फोर्स को डिटेक्ट करती है। वस्तुतः डिवाइस को मोबाइल फोन से कनैक्ट करके एक ऐप के जरिए उस दिशा में चला जाता है, जिस में ऐसा प्रतीत होता है कि वहां कुछ अज्ञात हरकत हो रही होती है। एप रेडिएशन को पकड लेता है। डिजिटल रिकॉर्डर को अईवीपी मशीन भी कहा जाता है। भूत खोजने वाले इसे भूतों वाली जगहों पर रहस्यमयी आवाजें सुनने के लिए इस्तेमाल करते हैं। कई इन्वेस्टिगेटर्स का मानना है कि इस डिजिटल रिकॉर्डर की आवाज से आत्माओं को फॉलो किया जा सकता है। कई व्लॉगर्स ने इस पर काम किया है। 

वैज्ञानिकों ने ईएमएफ मीटर बनाया है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड और आत्माओं की एक्टिविटी को ट्रेस कर सकती है। पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर्स का कहना है कि परालौकिक शक्तियों में मैग्नेटिक फील्ड को बदलने की ताकत होती है। मैग्नेटिक फील्ड के बदलते ही ये ईएमएफ मीटर इसे ट्रैक कर लेता है। पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर्स के बीच ये डिवाइस काफी फेमस है। वैज्ञानिकों ने घोस्ट बॉक्स बनाया है, जिसे फ्रैंक बॉक्स भी कहा जाता है। वह एक तरह का पोर्टेबल रेडियो है। इससे एमएम और एफएम बैंड भी कनेक्ट होता है। माना जाता है कि कई रहस्यमयी ताकतें ऑडियो संकेतों की मदद से अपना मैसेज देती हैं। इस डिवाइस का डिजिटल रिकॉर्डर की तरह उपयोग किया जा सकता है।

इसी प्रकार लेजर ग्रिड बनाई गई है। कोई अतृप्त आत्मा या शक्ति होने पर लेजर बीम जलने लगती है। इसे सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही कैमरा और कैम रिकॉर्डर भी लगाया जाता है। मार्केट में कई डिफ्रेंट फीचर्स वाले लेजर ग्रिड उपलब्ध हैं।

सामान्य आंखों से न दिखाई देने वाली आकृतियों को देखने के लिए मोशन डिटेक्टर या मोशन सेंसर का इस्तेमाल किया जाता। मान्यता है कि इस डिवाइस से ऐसी शक्तियों का आसानी से पता चल जाता है। मोशन सेंसर्स बहुत सेंसिटिव मूवमेंट्स को भी आसानी से ट्रैक कर लेते हैं।

वैज्ञानिक नजरिया है कि विद्युत आवेश से युक्त किसी वस्तु द्वारा उत्पन्न भौतिक क्षेत्र विद्युतचुम्बकीय क्षेत्र कहा जाता है। ऐसे क्षेत्र में स्थित किसी आवेशित वस्तु पर बल लगता है, चाहे यह वस्तु स्थिर हो या गतिमान। विद्युतचुम्बकीय अंतर्कि्रया प्रकृति में विद्यमान चार मूलभूत बलों में से एक है।

ज्ञातव्य है कि शार्क मछली रास्ता खोजने के लिए मैग्नेटिक फील्ड का उपयोग करती हैं। वैज्ञानिकों को अभी तक यह पता था कि समुद्री कछुए चुंबकीय संकेतों के जरिए यह जान पाते हैं कि उन्होंने हजारों दूर मील कहां अपने अंडे छिपा रखें हैं, लेकिन अभी तक यह पता नहीं चल सका था कि शार्क आखिर हजारों किलोमीटर दूर की यात्राओं में अपना रास्ता कैसे पता लगा लेती हैं। शोधकर्ताओं का पता चला है कि इसके लिए वे भी मैग्नेटिक फील्ड पर निर्भर करती हैं। वे पृथ्वी की मैग्ननेटिक फील्ड का उपयोग उनका रास्ता खोजने में करती हैं। यह एक तरह का प्राकृतिक जीपीएस है।


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