हालांकि गणेश जी और लाफिंग बुद्धा दो अलग-अलग परंपराओं के प्रतीक हैं, फिर भी जनमानस में इनके बीच कई समानताएं देखी जाती हैं। यही कारण है कि लोग दोनों को सुख-समृद्धि और सौभाग्य से जोड़ते हैं। गणेश जी को प्रसन्नवदन कहा गया है, वे मुस्कुराते हुए विघ्न हरते हैं। इसी प्रकार लाफिंग बुद्धा का पूरा व्यक्तित्व ही हंसी और खिलखिलाहट का प्रतीक है। गणेश जी को धन, बुद्धि और सफलता का दाता माना जाता है। लाफिंग बुद्धा को धन, भाग्य और संतोष से जोड़ा जाता है।
दोनों अभाव से नहीं, पूर्णता से जीने का भाव सिखाते हैं। गणेश जी का बड़ा उदर ब्रह्मांड को धारण करने का प्रतीक है। लाफिंग बुद्धा का पेट तृप्ति, उदारता और भरपूर जीवन दर्शाता है। गणेश जी और लाफिंग बुद्धा, दोनों हंसी, संतोष, समृद्धि और जीवन की बाधाओं को सहजता से पार करने का संदेश देते हैं। एक भक्ति के मार्ग से, दूसरा जीवन दर्शन के माध्यम से।
लाफिंग बुद्धा के बारे में बहुत सारी बातें प्रचलित हैं। ऐसी मान्यता है कि आप उदास रहते हैं, आर्थिक बोझ तले दबे हुए हैं, घर में उदासी जैसी स्थिति बनी रहती है, तो लाफिंग बुद्धा को अपने घर लाकर इन समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। फेंगशुई में अनेक प्रकार की वस्तुएं उपलब्ध हैं, जिसका हम प्रयोग करके अपने घर, किसी भी भवन या व्यावसायिक स्थल में उत्पन्न हो रहे वास्तु दोष से छुटकारा पा सकने में सक्षम हो जाते हैं।
लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को सुख, संपदा एवं प्रगति का प्रतीक माना जाता है। घर में इसके होने से संपन्नता, सफलता आती है। लाफिंग बुद्धा की मूर्ति मकान, व्यापार स्थल, लॉबी या फिर बैठक कक्ष में होनी चाहिए, लेकिन ध्यान रहे, यह जमीन से ढाई फीट ऊपर एवं मुख्य दरवाजे के सामने होनी चाहिए। मूर्ति का मुख हमेशा प्रवेश द्वार की ओर होना चाहिए। घर में इसे मुख्य द्वार के सामने स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आगंतुकों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इसकी अलग-अलग मुद्राएं होती हैं, जिनका फल भी अलग-अलग बताया गया है। चीनी मान्यतानुसार इसे बैड रूम में नहीं रखें। घर में इनकी स्थापना से धन-दौलत का आगमन निश्चित मान लिया जाता है। इनका मोटा पेट संपन्नता का प्रतीक है। इनके पेट को छूने की परंपरा है। चीन में लाफिंग बुद्धा को धन-वैभव-संपन्नता, सफलता और सुख-शांति का देवता मानते हैं।
हमारे यहां भगवान के कई अवतार हैं। हम भगवान को कई रूपों में मानते हैं। इसी तरह लाफिंग बुद्धा के भी कई रूप हैं। इनमें खासकर धन की पोटली लिए हुए, दोनों हाथों में कमंडल लिए हुए, वु लु (एक प्रकार का फल) लिए हुए, ड्रैगन के साथ बैठे हुए, कमंडल में बैठे हुए और कई बच्चों के साथ बैठे हुए बुद्धा प्रमुख हैं।
हंसता हुआ लाफिंग बुद्धा को भवन में मुख्य द्वार के अंदर इस प्रकार रखा जाता है. कि मुख्य द्वार से प्रवेश करने वाले व्यक्ति को प्रवेश करते ही यह दिखाई पड़े तथा ऐसा प्रतीत हो मानो कि बुद्धा हंस कर स्वागत कर रहा हो, लाफिंग बुद्धा को ढाई से तीन फुट की ऊंचाई पर किसी मेज या स्टूल पर रखना चाहिए। यदि मुख्य द्वार से प्रवेश करने पर सामने ही कोई कोना हो, तो लाफिंग बुद्धा को रखना अधिक अनुकूल होगा। लाफिंग बुद्धा को इस प्रकार नहीं रखें कि द्वार से प्रवेश करने वाला व्यक्ति उससे टकरा सके। शयनकक्ष में, रसोईघर या अन्य कमरों में हंसता हुआ बुद्धा नहीं रखना चाहिए।