तीसरी आंख

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शनिवार, मई 09, 2026

पंचक में मरने वाला 4 अन्य को भी ले जाता है?

हमारे यहां लोकविश्वास और ज्योतिषीय परंपराओं में यह मान्यता है कि पंचक में मरने वाला व्यक्ति चार अन्य को भी साथ ले जाता है। पहले यह जानते हैं कि पंचक क्या होता है? पंचक पांच नक्षत्रों का समूह है। धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती। जब चंद्रमा इन पांच नक्षत्रों में से किसी में होता है, तो उसे पंचक काल कहा जाता है। पुरानी ज्योतिष परंपराओं में यह कहा गया है कि पंचक में मृत्यु होने पर व्यक्ति अकेला नहीं जाता, बल्कि चार और लोगों को अपने साथ ले जाता है। इस विश्वास के पीछे तर्क यह था कि यह समय अशुभ या असंतुलित ऊर्जा वाला माना जाता था। इसलिए उस काल में अंत्येष्टि, बिस्तर या लकड़ी का काम, दक्षिण दिशा में यात्रा आदि कार्य वर्जित माने गए। ऐसा प्रतीत होता है कि यह धारणा केवल परंपरागत चेतावनी है, ताकि लोग अशुभ समय में बड़े कार्यों से बचें। भला किसी व्यक्ति की मृत्यु का दूसरों के जीवन पर सीधा प्रभाव कैसे पड सकता है? बावजूद इसके लोग परंपरा पर यकीन करते हैं। पंचक में मृत्यु होने पर अंत्येष्टि से पहले कुछ विशेष शांति उपाय किए जाते हैं, ताकि मृत व्यक्ति के साथ अन्य लोगों पर कोई अशुभ प्रभाव न पड़े।

एक उपाय यह है- कुश या घास से चार पुतले बनाए जाते हैं। इन्हें “प्रेत पुतला” कहा जाता है। फिर उस पुतलों की मृतक के साथ ही प्रतीकात्मक अंत्येष्टि कर दी जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से बाकी चार की मृत्यु का दोष समाप्त हो जाता है। कुछ जगहों पर “पंचक शांति” या “पंचक निवारण हवन” किया जाता है। इसमें विशिष्ट मंत्रों से अग्निहोत्र, हवन, और पितृ शांति की क्रिया कराई जाती है। यह क्रिया अक्सर “गरुड़ पुराण” या “पंचक शांति विधि” के अनुसार होती है।

पंचक दोष से बचने के लिए ब्राह्मणों को भोजन, दक्षिणा या अनाज का दान किया जाता है। कहीं-कहीं कंबल या वस्त्र दान भी किया जाता है। कुछ परंपराओं में कहा जाता है कि पंचक के समय चिता में लकड़ी की पांच गांठें या टुकड़े अधिक नहीं डालने चाहिए, ताकि पंचक का दोष न बढ़े।