तीसरी आंख

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शनिवार, जनवरी 10, 2026

चैट जीपीटी से मौलिक लेखकों पर संकट?

इन दिनों चैट जीपीटी का बोलबाला है। लेखन से लेकर शोध तक, हर क्षेत्र में इसका प्रयोग तेजी से बढ़ा है। खासकर किसी विषय पर आलेख तैयार करने के लिए लोग केवल एक हेडिंग देते हैं और क्षण भर में तैयार लेख प्राप्त कर लेते हैं। वस्तुतः चैट जीपीटी इंटरनेट पर उपलब्ध तथ्यों, सूचनाओं और शैलियों को समेटकर उन्हें सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत कर देता है।

ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न उठता है, क्या इससे मौलिक लेखकों के सामने संकट खड़ा हो रहा है? जब मशीन लेखन उपलब्ध है, तो कोई प्रकाशक या संपादक किसी मौलिक लेखक को प्राथमिकता क्यों देगा? दिलचस्प है कि यही प्रश्न जब चैट जीपीटी से पूछा गया, तो उसका उत्तर अपेक्षाकृत ईमानदार और संतुलित था। उसके अनुसार, मौलिक लेखकों का अंत नहीं होगा, लेकिन लेखन की दुनिया का स्वरूप अवश्य बदलेगा।

चैट जीपीटी जैसे एआई टूल साधारण, फॉर्मूलानुमा और सूचना-आधारित लेखन में बेहद सक्षम हैं। खबरों का पुनर्लेखन, सामान्य ज्ञान, सतही विश्लेषण या एसईओ आधारित सामग्री, इन क्षेत्रों में एआई तेज, सस्ता और पर्याप्त साबित हो सकता है। निस्संदेह, इससे औसत स्तर के कॉलम और कंटेंट लेखन में मानव लेखकों की मांग घट सकती है।

लेकिन यहीं से मौलिक लेखक की असली पहचान शुरू होती है। मौलिक लेखन अनुभव से जन्म लेता है और अनुभव मशीन के पास नहीं होता। भूख की टीस, सत्ता का दमन, प्रेम की विफलता, लोकजीवन की गंध, विस्थापन का दर्द या समय की बेचौनी, इन सबको लेखक जीता है, तब लिखता है। एआई इन भावनाओं की नकल कर सकता है, अनुभूति नहीं।

व्यवस्था से टकराने वाला लेख, जोखिम उठाने वाली कविता और समय के विरुद्ध खड़ा निबंध,यह दृष्टि है, विजन है, जो अभी भी मानवीय चेतना की देन है। मशीन आंकड़े दे सकती है, संदर्भ जोड़ सकती है, लेकिन नैतिक साहस और वैचारिक टकराव नहीं रच सकती।

हां, जो लेखक नई भाषा नहीं गढ़ता, नए प्रश्न नहीं उठाता और पुरानी लकीरों पर ही चलता रहता है, उसके लिए एआई सचमुच खतरा है। लेकिन जो लेखक अपने समय को पढ़ता है, लोक, दर्शन, इतिहास और निजी अनुभव को जोड़कर अपनी अलग आवाज पहचानता है, उसके लिए एआई केवल एक औजार है, प्रतिद्वंद्वी नहीं।

भविष्य में संभवतः श्रेष्ठ लेखन का नया मॉडल सामने आएगा, जहां लेखक सोच देगा, दृष्टि देगा और एआई संरचना, संपादन तथा संदर्भ में सहायक बनेगा। जैसे कैमरे के आने से चित्रकार समाप्त नहीं हुए, बल्कि चित्रकला के नए रूप सामने आए, वैसे ही एआई से लेखक समाप्त नहीं होंगे।

कुल मिलाकर, चैट जीपीटी मौलिक लेखकों के लिए खतरा नहीं, बल्कि औसत और यांत्रिक लेखन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है।