तीसरी आंख

जिसे वह सब दिखाई देता है, जो सामान्य आंखों से नहीं दिखाई देता है

मंगलवार, अप्रैल 07, 2015

पाकिस्तान में हैं ख्वाजा साहेब के असली सज्जादानशीन?

महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह से जुड़ा सज्जादानशीन का पुराना मसला दरगाह दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान और खुद्दाम हजरात कभी खत्म होगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता, मगर एक फेसबुक पेज और इंटरनेट पर बनी साइट एक नए मसले को पैदा कर रही है। एक ओर जहां दरगाह दीवान सुप्रीम कोर्ट के फैसले की रोशनी में खुद को ख्वाजा साहब का सज्जादानशीन करार देते हैं, वहीं फेसबुक पेज व साइट ये दावा करती है कि ख्वाजा साहब के ऑरीजिनल सज्जादानशीन तो पाकिस्तान में हैं। बेशक भारत में यहां के संविधान के मुताबिक जरूर दरगाह दीवान का दावा ही मजबूत माना जाएगा। इसकी वजह ये भी है कि ख्वाजा साहेब की मजार शरीफ अजमेर में ही है, मगर दुनिया को ग्लोबल विलेज बना रहा इंटरनेट अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तो यही जता रहा है कि ख्वाजा साहेब के असली सज्जादानशीन तो पाकिस्तान में हैं।

असल में जैसे ही सज्जादानशीन से जुड़े ताजा मसले पर अपनी लेखनी चलाई तो मेरे एक मित्र, जो कि जनाब शैखुल मशायख दीवान सैयद इनायत हुसैन साहब के विसाल के बाद 21 सितम्बर 1959 से 8 जुलाई 1975 तक 35वें दीवान रहे सैयद सोलत हुसैन साहब के साहबजादे सैयद नजम चिश्ती ने मुझे बताया कि आप जरा आप फेसबुक पेज Original Sajjada Nasheen of Hazrat Khawaja Syed Moin Uddin Chishti Ajmairi Public Figure पर भी गौर फरमाइये, जिसमें बताया गया है कि असल सज्जादानशीन तो पाकिस्तान में हैं। इस पर मैने न केवल उस फेसबुक पेज  पर गौर किया, बल्कि उसमें दिए गए साइट के लिंक पर जा कर वह साइट भी देखी। इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि हिंदुस्तान के विभाजन के वक्त ख्वाजा साहब के सज्जादानशीन हजरत दीवान सैयद आले रसूल अली खान पाकिस्तान चले गए। उनके 1973 में विसाल के बाद हजरत दीवान सैयद आले मुज्तबा अली खान सज्जादानशीन बने। उनके विसाल के बाद 2001 में शेखउल मशायख हजरत दीवान सैयद आले हबीब अली खान सज्जादानशीन बने। बहरहाल, उस फेसबुक पेज पर दी गई जानकारी को हूबहू यहां पेश किया जा रहा है:-
Short Description
DEDICATE TO OUR BELOVED SUFFI SAINT HAZRAT KHWAJA SYED MOEIN U DIN HASAN (RA) AND HIS DESCENDANT ,SAJJADA NASHEEN DARGAH AJMER

Long Description
Sheikh Ul Mushaikh Hazrat Dewan Syed Aalay Rasool Ali Khan (R A) has hold the Position of Sajjada Nashin Ajmer sharif in 1923 1973.After the Creation of Pakistan The Descendant of Hazrat Khawaja Ghareb Nawaz (R.A) migrated to the Pakistan. In Pakistan their stay Was With sheikh UL Islam Hazrat Qamar Ud Din Sialvi (R A) (sargodha) till 1960. After that the Descendants of khawaja sahab shifted to Peshawar. The last Dewan Who Migrated from Ajmer Sharif was Died in Peshawar in 1973 Where after the death of Hazrat Dewan Sayed Alley Rasool Ali Khan (R A) his son Hazrat Dewan Syed Aalay Mujtaba Ali Khan (R A) was appointed as Sajjada Nashin Ajmer Sharif.He followed the footstep of his great father. His services have been admitted national and international level .
A foundation store was laid down for a complex with the name Gulshan e Sultan UL hind Ajmeri complex, in 1992. Astana-e-Aaliya Moinia Chishtiya is now became the Holy Place for All chishtis as two of the descendants of Khawaja Gharib Nawaz Are Buried here .He died at the age of 81 year when he was reciting the Holy Quran.
after the death of Hazrat Dewan Syed Aalay Mujtaba Ali Khan (R A) ,his son hazrat Dewan Syed Aalay Habib Ali Khan appointed as Sajjada nashin Ajmer sharif. He has done MA (Arabic) from the University of Peshawar.He was awarded Gold Medal in MA Arabic. Genealogically he linked with Hazrat Muhammad Salalhu Alaihay Wa Ala Aalayhi Wasalam at 37 generation and at 39 with sisila e tareeqat.
The work ancestor of Hazrat Khawaja Gharib Nawaz (R A) is a golden chapter of our history.His descendants has also been working on his mission.All Pakistanis especially the people of Attock Rawalpindi and Islamabad are lucky that the descendant of Hazrat Khawaja Gharib Nawaz (R A) is among them. They proved that they are real descendants of the Hazrat Khawaja Gharib Nawaz (R A) by showing an excellent management administration and people of spiritual qualities of highest order before the creation of Pakistan.

Bio
Sheikh ul Mashaikh Hazrat Dewan Syed Aalay Habib Ali Khan appointed as Sajjada nashin Ajmer sharif in 2001. He has done MA (Arabic) from the University of Peshawar.He was awarded Gold Medal in MA Arabic. Genealogically he linked with Hazrat Muhammad Salalhu Alaihay Wa Ala Aalayhi Wasalam at 37 generation and at 39 with sisila e tareeqat.

Personal Information
Hazrat Dewan Syed Aalay Habib Ali Khan appointed as Sajjada nashin Ajmer sharif in 2001. He has done MA (Arabic) from the University of Peshawar.He was awarded Gold Medal in MA Arabic. Genealogically he linked with Hazrat Muhammad Salalhu Alaihay Wa Ala Aalayhi Wasalam at 37 generation and at 39 with sisila e tareeqat.

Phone
+923005300822

Website
http://sajjadanasheenajmer.wix.com/dargah

उनकी वेब साइट पर ख्वाजा साहेब के सिलसिले और पाकिस्तान में उनके बाद रहे सज्जादानशीन के बारे में और उनके अलावा बहुत सारी और मालूमात भी दी गई हैं।
खैर, बताया जाता है कि पाकिस्तान के लोग भले ही अजमेर में मौजूद दरगाह शरीफ की जियारत करने को आते हैं, मगर साथ ही उनके देश में मौजूद असली सज्जादानशीन की भी पूरी इज्जत करते हैं।
गौरतलब है कि ज्ञातव्य है कि हाल ही मुस्लिमों का एक दल जब दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिला तो उसमें अजमेर के सैयद सुल्तान उल हसन भी शामिल थे। उन्होंने ख्वाजा साहेब का सज्जादानशीन बताये जाने पर अजमेर में दरगाह दीवान ने उस पर कड़ा ऐतराज किया। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति प्रधानमंत्री से अजमेर के सज्जदानशीन के रूप में मिला है, वह अजमेर का सज्जदानशीन नहीं है। असल में यदि सज्जादानशीन शब्द पर गौर करें तो इसका मतलब औलाद व वश्ंाज से होता है। और जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दीवान ख्वाजा साहब के निकटतम उत्तराधिकारी घोषित किए जा चुके हैं तो जाहिर है जब भी कोई अपने आपको ख्वाजा साहब का सज्जादानशीन बताने की कोशिश करेगा तो उस पर दरगाह दीवान का ऐतराज आएगा ही। मगर सवाल ये है कि क्या वे इंटरनेट पर मौजूद असली सज्जादानशीन की जानकारी पर भी सवाल खड़ा करेंगे? यहां मैं यह साफ करना वाजिब समझता हूं कि ये मुद्दा उठाने के पीछे दीवान साहेब या खुद्दाम हजरात की शान में गुस्ताखी करना नहीं, बल्कि एक पहलु को सामने लाना मात्र है।
-तेजवानी गिरधर
7742067000